ई- जर्नलिज्म का बढ़ा है चलन, डिजिटल मीडिया में स्टूडेंट्स बना रहे है करियर

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डॉ. सुभाष कुमार (हैड, पत्रकारिता विभाग, मणिपाल विश्वविद्यालय, जयपुर)
डॉ. सुभाष कुमार (हैड, पत्रकारिता विभाग, मणिपाल विश्वविद्यालय, जयपुर)

डॉ. सुभाष कुमार (हैड, जर्नलिज्म डिपार्टमेंट, मणिपाल विश्वविद्यालय, जयपुर)

जयपुर। नई पीढ़ी के लिए ई-कम्यूनिकेशन किसी वरदान से कम नहीं है। आज का दौर कई सारी संभावनाओं का जन्मदाता है। वर्तमान पत्रकारिता का परिदृश्य इसी दिशा पर टिका हुआ है। भविष्य में होने वाले परिवर्तनों को ई-कम्यूनिकेशन के साथ जोड़कर देखा जाने लगा है। अब पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए ई-जर्नलिज्म एक ऐसा शब्द बन चुका है जो उनके करियर को उच्चतम स्तर पर ले जा सकेगा। प्रिटं पत्रकारिता के सैकड़ों सालों तक चले आधिपत्य के बाद इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने समाज को बदलने में क्रांति के अग्रदूत की तरह काम किया। समाज इसके प्रभावों को नकार नहीं सकता ठीक उसी तरह डिजिटल मीडिया के प्रभावों को आज हम नकार नहीं सकते। हालांकि लोकतंत्र में प्रेस एक मजबूत स्तंभ है। पत्रकारिता टीवी की हो या प्रिंट की, दोनों ही ताकतवर होती हैं लेकिन लिखे शब्दों में अधिक ताकत होती है। ऐसे में तत्काल मिलने वाले कंटेंट को रोचक बनाकर लोगों तक पहुंचाने में न्यू मीडिया ने शानदार काम किया है। गेटकीपर की अनदेखी भी लोगों के लिए सहनीय हो गई है। अब फेक कंटेंट के साथ भी लोग अपनी समझ से अविश्वास बनाने में यकीन करने लगे है। अब दौर बदल रहा है लोगों ने ई-कम्यूनिकेशन के बढ़ते माध्यमों को जीवन से जोड़ लिया है। इन्हीं माध्यमों का पत्रकारिता अध्ययन और अध्यापन पर भी गहरा असर पड़ा रहा है। बदलते परिवेश के साथ डिजिटल लर्निंग बढ़ रही है। ऑनलाइन इंटर्नशिप से लेकर ऑनलाइन प्लेसमेंट में भी मीडिया हाउसेज पत्रकारिता छात्रों की भर्ती कर रहे हैं। कोविड़ से उत्पन्न हुई इन परिस्थितियों ने नए संसार को जन्म दिया है। सीखने और सिखाने के इस दौर में ऑनलाइन लर्निंग एक सशक्त माध्यम बनती जा रही है। मीडिया स्टूडेंट्स के लिए भी शुरूआती दिनों में ये माध्यम नए थे लेकिन समय के साथ परिवेश भी बदला। अब मीडिया स्टूडेंट्स के लिए ये परिवेश स्वीकार्य रूप ले चुका है। अब गुगल क्लासरूम से लेकर जूम मीटिंग जैसे डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म पर स्टूडेंट्स फ्रेंडली हो रहे है। यहां तक की क्लासरूम के नोट्स से लेकर ऑपन बुक एग्जाम तक ऑनलाइन घर बैठे छात्र दे रहे है। इन सबके अलावा ई सेमीनार, ई वर्कशॉप और मीडिया शिक्षकों के लिए ई फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम घर बैठे कुछ नया सीखने के लिए माध्यम बनते जा रहे है। ऐसे में ई- जर्नलिज्म के प्रसार को देखते हुए स्टूडेंट्स और पैरेंट्स चिंतित होते है लेकिन इसे सकारात्मकता से अपनाना चाहिए। यहां तक की अब कई विश्वविद्यालय ऑनलाइन लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए डिग्री और डिप्लोमा कोर्सेज ऑनलाइन ही प्रोवाइड करवा रहे है। ऐसे में समय की मांग को देखते हुए इसकी जरूरत को महसूस किया जा सकता है।

शुरू होगा वर्चुअल रियलिटी का दौर
वर्चुअल पत्रकारिता के क्षेत्र में दुनिया में नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। भविष्य में ऑनलाइन मीडिया के क्षेत्र में वर्चुअल रियलिटी का दौर होगा। पत्रकारिता से जुड़ा जो व्यक्ति इस नई तकनीक को सीखकर इस दिशा में काम करेगा वही ऑनलाइन पत्रकारिता के क्षेत्र में खुद को साबित कर पाएगा। भारत में ऑनलाइन मीडिया के यूजर बढ़ रहे है। साथ ही इस क्षेत्र में करियर के लिए संभावनाएं बढ़ रही हैं। ऑनलाइन क्षेत्र में खूब नौकरियां हैं लेकिन जरूरत ऐसे लोगों की है जो स्किल बेस्ड काम को कर सकने में योग्य हो। वर्तमान दौर में पाठक अब प्रिंट से रेडियों और टीवी से गुजरते हुए इंटरनेट पर आकर रूक गए है। अब पाठकों को एक प्लेटफार्म पर ही ऑडियो, वीडियो, टैक्स्ट, ग्राफिक्स, कार्टून और फोटो सबकुछ मिलता है। अब जरूरत है ऐसे लोगों की जो एक स्टोरी को तैयार करने के लिए ऑडियो, वीडियो, फोटो का हुनर जानते हो।

इंटरेक्टिव मीडिया देगा अपनी बात कहने की पूरी आजादी
डिजिटल मीडिया की दूसरी बड़ी खूबी यह भी है कि यह इंटरेक्टिव मोड पर काम करता है।
इसमें यूजर को अपनी बात कहने का पूरा मौका मिलता है। ऐसे में यूजर्स की बढ़ती भागीदारी इंटरेक्टिव मीडिया में अपनी बात कहने की पूरी आजादी देता है। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया आज स्मार्टफोन की गिरफ्त में है। जिसकी वजह से आम आदमी की पहुंच भी वेब मीडिया तक हो गई है।

मीडिया इनोवेशन और एन्टरप्रेन्योरशिप भी बेहतर विकल्प
मास कम्यूनिकेशन के कई सारे वर्टिकल्स में नौकरियां तलाशने वाले मीडिया अध्ययनरत स्टूडेंट्स के लिए मीडिया इनोवेशन और एन्टरप्रेन्योरशिप भी बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जाने लगा है। ऐसे में स्टूडेंट्स खुद का डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करके इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है। सैकडों ऐसे उदाहरण है जिन्होंने मैन स्ट्रीम पत्रकारिता के बाद ऑनलाइन मीडियम को चुना और आज एन्टरप्रेन्योरशिप में बेहतर काम कर रहे है। इन सबके अलावा पत्रकारिता में रिपोर्टिंग के अलावा डिजाइनिंग, पब्लिक रिलेशन में किसी भी कंपनी की बेहतर इमेज बनाने के लिए हुनरमंद भाषाविद लोगों की जरूरत होती हैं। रेडियों में रेडियों जॉकी से लेकर विडियों जॉकी और बैक ऑफिस के काम के लिए पत्रकारिता के छात्रों को लिया जा रहा है। सोशल मीडिया मार्केटिंग के लिए स्किल बेस्ड स्टूडेंट्स की जरूरत पड़ती है।
ऐसे में पत्रकारिता और मास कम्यूनिकेशन के कई कोर्सेज है जो स्टूडेंट्स को इन क्षेत्रों में जाने के लिए योग्य बना सकते है।

सोशल मीडिया मार्केटिंग का बढ़ता ट्रैंड
पब्लिक रिलेशन काम को बेहतर बनाने में सोशल मीडिया मार्केटिंग (एसएमएम) का योगदान बढ़ता जा रहा है। लोग अब विज्ञापन और खबरों के लिए अखबारों से ज्यादा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तलाश रहे है। यहां तक की इंस्टाग्राम पर भी लोग अपनी खबरों की क्लिप्स और पोस्ट्स शेयर करवाते है। कई सारे ऐसे इन्फ्ल्एंसर्स है जिन्होंने फेसबुक और इंस्टाग्राम पेज बनाकर मार्केटिंग का नया तरीका ढूंढ लिया है। ये लोग यूट्यूब के अलावा अब फेसबुक और इंस्टाग्राम भी प्रॉड्क्ट्स् की ब्रांडिगं और प्रमोशन करते नजर आते है। यहां तक की राजनीति में आने वाले लोग भी इंस्टाग्राम पर फॉलोवर्स बढ़ाते दिखते है। ऐसे में ये देखा गया है कि आने वाला समय सोशल मीडिया के रूप में बड़ी क्रांति का द्योतक बनेगा। वर्तमान में पत्रकारिता का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए ये समय चुनौती के साथ कई बड़ी संभावनाओं को भी पैदा करेगा, बस जरूरत है तो अपनी स्किल्स को डवलप कर इसके साथ आगे बढ़ने की

पत्रकारिता और मास कम्यूनिकेशन के प्रमुख कोर्स
-बैचलर डिग्री इन मास कम्यूनिकेशन
-मास्टर डिग्री इन मास कम्यूनिकेशन
-पीजी डिप्लोमा इन मास कम्यूनिकेशन
-एमए इन जर्नलिज्म
-डिप्लोमा इन जर्नलिज्म -डिग्री/डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड पब्लिक रिलेशन
-पीजी डिप्लोमा इन मास मीडिया पीएचड़ी, पीडीएफ

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