स्मृति विशेष: स्वतंत्रता सेनानी कमलादेवी चट्टोपाध्याय, भारतीय महिला आंदोलनों की जनक।

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तौफीक़ हयात


इतिहास के पन्नों में कई ऐसे नाम दर्ज है जिन्हें अपनी अलग ही शख्सियत के लिए याद किया जाता है। भारत को आजादी दिलाने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी भूमिका इतिहास के पन्नों में दर्ज करवाई। ऐसा ही एक नाम है कमलादेवी चट्टोपाध्याय का।
कमलादेवी एक समाजसुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, गांधीवादी और भारतीय हस्तकला के क्षेत्र में नई रौशनी की किरण लाने वाली महिला थी।
कमलादेवी एक ऐसी महिला थीं जिन्हे बस देश की आजादी नजर आती थी। उन्होंने आजादी की मांग, नमक आंदोलन और असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया।
महिलाओं का स्वतंत्रता आंदोलनों में हिस्सा लेने का श्रेय कमलादेवी चट्टोपाध्याय को ही जाता है। उन्होंने अपनी कुशल बुद्धिमत्ता से महात्मा गांधी को महिलाओं को आंदोलन में भागीदारी के लिए राजी कर लिया। खुद कमला देवी ने नमक आंदोलन में गांधीजी के साथ दाडी यात्रा की थी और नमक कानून को तोड़ा था।
कमला देवी का जन्म 3 अप्रैल 1903 को कर्नाटक के मैंगलोर शहर में हुआ था। वह एक सम्पन्न ब्राह्मण परिवार से संबंध रखती थी। उनके पिता उस समय मेंगलोर के जिला कलेक्टर थे और उनकी माँ का संबंध राजघराने से था।
कमला देवी की शादी महज 14 वर्ष की आयु में हो गई थी लेकिन उसके 2 साल बाद ही उनके पति की मृत्यु हो गई। बाद में समाज सुधारक के रूप में पहचान बना चुकीं कमला देवी की मुलाकात सरोजनी नायडू के भाई हरेंद्र नाथ चटोपाध्याय से हुई तथा दोनों ने शादी कर ली। हालांकि किसी कारणों से दोनों का आपस में तलाक हो गया था।
कमलादेवी एक उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रही। उन्होंने अंग्रेज़ों के शासनकाल में धराशायी हो चुके हस्तशिल्प कला और हथकरघों को पुनर्जीवित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इस क्षेत्र में उनकी सफलता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे जब भी किसी गांव, कस्बे की ओर रुख करती थी तो वहां के बुनकर, जुलाहे, हस्तशिल्प कारीगर उन्हें सम्मान देने के लिए अपनी पगड़ी तक उतारकर उनके चरणों में रख दिया करते थे। हस्तशिल्प कलाओं, हथकरघों को राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थान देने का श्रेय भी कमलादेवी को जाता है। यही कारण है साल 1952 में ‘ ऑल इंडिया हैंडीक्राफ्ट’ का प्रमुख कमलादेवी को नियुक्त किया गया। भारत में मौजूद ‘ क्राफ्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ‘ जैसे संस्थान इन्हीं के प्रयासों का एक नतीजा हैं।

कमला देवी को भारत के सर्वोच्च सम्मान पद्म विभूषण से भी को सम्मानित किया गया। साल 1966 में एशियाई हस्तियों और संस्थाओं के लिए विशेष कार्य करने पर इन्हें रमन मैग्सेसे अवार्ड से भी नवाज़ा गया। इतना ही नहीं इन्हें साल 1974 में लाइफटाइम एचीवमेंट पुरस्कार और शांति निकेतन द्वारा देसिकोत्तम जैसे सर्वोच्च सम्मान भी मिले हैं। साल 1988 में 29 अक्टूबर के दिन 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली और दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

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