हॉकी के मेजर ध्यान चंद l

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Olympic में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी।


जयपुर। Tokyo Olympic 2020 के बाद भारतीय युवाओं में हॉकी के प्रति अलग ही तरह का उत्साह जागा है। वही कल भारत के प्रधान मंत्री मोदी ने भारत का सर्वश्रेष्ठ खेल पुरुस्कार राजीव गांधी खेल पुरुस्कार का नाम राजीव गांधी से हटाकर मेजर ध्यानचंद पर रख दिया है।जिसकी कई खिलाड़ियों ने सरहाना की। बता दे यह खेल रत्न भारत में खेल के क्षेत्र मे अपना नाम बनाने वालो तथा भारत का नाम विश्व स्तर पर पहुंचाने वाले खिलाड़ियों को मिलता है।
पर सवाल यह खड़ा उठता है की मेजर ध्यानचंद है कोन और इन्होंने ऐसा क्या किया था जो इनके नाम पर इतने बड़े पुरुस्कार का नाम रखा गया आइए जानते है।
मेजर ध्यान चंद भारत की स्वतंत्रता से पहले की भारतीय हॉकी टीम के captainforward player थे जिनके नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम ने 3 Olympic खेलों में लगातार स्वर्ण पदक हासिल किए। उनके अकेले के नाम ओलंपिक में 33 से ज्यादा गोल दर्ज है। परंतु ध्यानचंद को मानने का यही सिर्फ एक मात्र कारण नहीं है। बता दे ध्यान चंद को हॉकी का जादूगर माना जाता था। साथ बताया जाता है की जब ध्यानचंद हॉकिस्टिक से गेंद आगे लेकर बढ़ते थे तो उनसे गेंद छीनना असंभव था। साथ ही उनका स्टिक और गेंद पर ऐसा नियंत्रण था के लगता था गेंद उनकी स्टिक से जा चिपकी हो। कई बार तो खेल के बीच में उनकी हॉकी स्टिक को आधी करकर देखा गया की कही उनकी हॉकिस्टिक में चुंबक तो नही। और इन सब घटनाओं का जब होना इसे और भी दिलचस्प बना देता है जब हॉकी पीच असली घास के हुआ करते थे ना की टर्फ के। असली घास का पीच मिट्टी से बना हुआ होता है जिसकी सतह बराबर न होकर उबड़ खाबड़ होती है और इस पर गेंद का ऐसा नियंत्रण पाना मानवता के बस के बाहर माना जा सकता है। यही कारण है के आज भारत मेजर ध्यानचंद को इतना मानता है।
इस खेल पुरुस्कार का नाम भारत के सबसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के नाम पर रखा जाना भारत में खेल क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है।

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