रूट कैनाल पद्धति और उसके निदान

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डॉ. जिज्ञासा रावल
डॉ. जिज्ञासा रावल

डॉ. जिज्ञासा रावल बता रही है दांतो की बेहतर चिकित्सा पद्धति।

डाॅ जिज्ञासा रावल
राजकीय दंत चिकित्सा अधिकारी

जयपुर।
बीते जमाने में दाँत खोखले होने पर निकालने के सिवा कोई चारा नहीं होता था। आज दंत चिकित्सा विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है। अब खोखले दाँतों को बचाना आसान हो गया है। रूट कैनाल ट्रीटमेंट मूल दाँतों को बचाने का तरीका है।
दाँतों की ऊपरी सतह यानी इनेमल पर सड़न हो तो उसे फिलिंग करके ठीक कर लिया जाता है, लेकिन जब सड़न जड़ (पल्प) तक पहुँच जाती है तो मरीज को बेहद दर्द होता है। ऐसे दाँतों को अब रूट कैनाल पद्धति से बचा लिया जाता है, जबकि पहले इन्हें निकाल दिया जाता था। दाँत निकालने का नुकसान यह होता था कि निकले हुए दाँतों के खाली हो चुके स्थान पर आसपास के दाँत खिसकने लगते थे। इससे एक तो मुँह का शेप बिगड़ता था, दूसरे खाना चबाने में तकलीफ होती थी। इसका एक ही उपाय था नकली दाँत लगाना। नकली दाँत भी दो तरीके से लगाए जाते हैं। एक किस्म का नकली दाँत निकल सकने वाला होता है, दूसरे किस्म के नकली दाँत को फिक्स कर दिया जाता है।

प्रत्येक दाँत में एक या एक से अधिक रूट कैनाल होती है। हर कैनाल में पल्प मौजूद रहता है। पल्प के अंदर नाड़ियाँ, खून की नलिकाएँ तथा जोड़ने वाले ऊतक होते हैं। सड़ने के कारण पल्प नष्ट हो जाता है जिससे असहनीय पीड़ा होती है।

क्या है रूट कैनाल पद्धति
सड़े हुए दाँत के ऊपरी हिस्से यानी क्राउन से ड्रिल करके कैनाल को खोल लिया जाता है। इसके साथ पूरा पल्प निकाल लिया जाता है। इसके बाद पूरे कैनाल की हाइड्रोजन पैराक्साइड एवं सोडियम हायपोक्लोराइड से सफाई की जाती है। फिर गटापार्चा फिलर से इसे पूरी तरह भर दिया जाता है। इसके बाद सिल्वर फिलिंग या टूथ कलर फिलिंग से दाँत को सील कर दिया जाता है। दाँत को मजबूती प्रदान करने के लिए रूट कैनाल ट्रीटमेंट के बाद इस पर कैप अथवा क्राउन लगाना आवश्यक होता है। क्राउन नहीं लगाने पर दाँत टूट सकता है।
कितना समय लगता है ?
प्रारंभिक अवस्था में इलाज कराने पर एक अथवा दो सिटिंग में ही इलाज पूरा किया जा सकता है। पहली सिटिंग में ट्रीटमेंट टाइम 30-40 मिनट तक हो सकता है। अगर मरीज की लापरवाह से वहाँ संक्रमण हो जाए तो 4 से 5 सिटिंग लग सकती हैं।
आधुनिक उपकरण
दंत चिकित्सा विज्ञान के आधुनिक उपकरणों ने जहाँ मरीजों की पीड़ा को कम किया है वहीं दंत चिकित्सक का काम भी आसान कर दिया है। वायरलेस डिजिटल एक्स-रे के उपयोग से रूट कैनाल ट्रीटमेंट अधिक कुशलतापूर्वक और कम समय में किया जा सकता है। मरीज को लैपटॉप पर उसके दाँत का एक्स-रे दिखाया जा सकता है। दाँत का आकार भी इसमें बड़ा और स्पष्ट दिखाई देता है। इससे चिकित्सक का काम भी आसान हो जाता है।

कितना दर्द होता है

दंत चिकित्सा में मरीज को कितना कम या ज्यादा दर्द हो रहा है, इसका बड़ा महत्व है। लगभग सभी मरीज रूट कैनाल ट्रीटमेंट में होने वाले दर्द के बारे में जानना चाहते हैं। मरीज को सबसे पहले एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। इससे मरीज को संक्रमण का जोखिम कम हो जाता है। यदि मरीज को असहनीय दर्द हो तो लोकल एनेस्थेसिया दिया जाता है। अगर इससे भी दर्द न मिटे तो पल्प डिवाइटालाइजर का प्रयोग किया जाता है। इससे मरीज को बिलकुल दर्द महसूस नहीं होता।

सुंदर मुस्कान और स्वस्थ दांतों के लिए टिप्स
हर चेहरे पर फबती है एक सुंदर सी मुस्कान. और मुस्कान को सुंदर बनाते हैं आपके स्वस्थ दांत. अगर दांत पीले होंगे, उनमें कीड़े लगे होंगे या फिर खून जमा होगा तो आपकी मुस्कान को नजर लग सकती है अस्वस्थ दांतों की. इतना ही नहीं, पेट से जुड़ी कई समस्याएं भी दांतों में पैदा हुई कई बीमारियों की वजह से जन्म ले सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि आप मानसून के दौरान दांतों से संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं, जो दांतों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए टूथब्रश बदलना जरूरी है और नियमित रूप से दांतों को फ्लॉस (दांत साफ करने वाला धागा) करें. कुछ सावधानियों को बरत कर आप अपने दांतों को स्वस्थ रख सकते हैं.

अपने टूथब्रश को अक्सर बदलते रहें और नया टूथब्रश इस्तेमाल करें क्योंकि इससे मुंह की स्वच्छता को बरकरार रखने में मदद मिलती है.

नियमित रूप से फ्लॉस करना चाहिए. सुझाए गए फ्लॉस की लंबाई हर फ्लॉसिंग सेशन में 18 इंच है. दिन-प्रतिदिन के फ्लॉसिंग प्लान के हिसाब से एक महीने में यह करीब 45 फीट का हो जाएगा.

विटामिन सी और कैल्शियम युक्त उचित स्वास्थ्यपरक आहार के साथ

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