UP ASSEMBLY ELECTION 2022

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UP में पहले चरण का मतदान 10 फरवरी को ; किसने कितनी रैलियां की और क्या थे पिछली बार के नतीजे

Aysha Khatoon Siddique

उत्तर-प्रदेश में विधानसभा चुनाव का आगाज होने ही वाला है। पहले चरण का मतदान मंगलवार 10 फरवरी को होगा। इसके बाद पश्चिमी यूपी के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर जीत का दम भर रहे उम्मीदवारों की किस्मत EVM में कैद हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी को पहले चरण में एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 सीटों पर वोट पड़ेंगे। इनमें शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, अलीगढ़, बुलंदशहर, आगरा और मथुरा शामिल हैं।

इस बार कोरोना की वजह से चुनाव प्रचार का तरीका थोड़ा बदला नज़र आ रहा था। न ही हेलिकॉप्टर की गड़गड़ाहट थी , बड़ी-बड़ी रैलियों में लाउडस्पीकर और नारों का शोर भी इस बार बहुत कम था। इसके बावजूद नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पहले चरण में प्रचार पर सबसे ज्यादा मेहनत भाजपा नेताओं ने की। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पहले चरण में सिर्फ 3 रैलियां ही की। भाजपा को तगड़ी टक्कर सिर्फ अखिलेश यादव देते नजर आए। उन्होंने लगातार रैलियां की। पहले चरण के प्रचार में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ही मैदान में नजर आईं।

Amit Shah in a BJP Rall

भाजपा ने की मेहनत
पहले चरण के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड़्डा, सीएम योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के साथ केंद्र सरकार के तमाम मंत्री और सांसद लगातार चौपाल और डोर-टू-डोर कैंपेन के जरिए महौल बनाने की कोशिश करते रहे।

किसने कितनी रैलियां की ?

• BJP (भाजपा)

नरेंद्र मोदी, पीएम : कुल 4 वर्चुअल रैली संबोधित कीं। पहले फेज के सभी 11 जिलों में वर्चुअल रैली की।
योगी आदित्यनाथ, सीएम : कुल 37 जनसभाएं और डोर टू डोर कैंपेन कर चुके हैं। इनमें 30 छोटी जनसभाएं, 5 डोर टू डोर कैंपेन, 2 संगठन के कार्यक्रम किए। पहले फेज के सभी 11 जिलों में प्रचार किया।
अमित शाह, गृहमंत्री : कुल 15 जनसभा और डोर टू डोर कैंपेन किए। जिसमें 8 छोटी जन सभाएं कीं। 5 डोर टू डोर कैंपेन और 2 संगठन के कार्यक्रम किए। पहले चरण के 9 जिलों में प्रचार किया।
केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम : 12 रैलियां की। लोगों को संबोधित किया।
नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री : जनविश्वास यात्रा निकाल चुके हैं।
धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री : 25 नवंबर से प्रचार शुरू किया।
स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री : एक जनसभा की।
अनुराग ठाकुर, केंद्रीय मंत्री : एक जनसभा की।
उमा भारती, केंद्रीय मंत्री : एक जनसभा की।
रवि किशन, सांसद : एक जनसभा की।

Akhilesh Yadav in election rally

सपा-रालोद

भाजपा के बाद दसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी रही। पश्चिम में सपा और रालोद के गठबंधन में दोनों पार्टी के बड़े नेताओं ने मेहनत की है। प्रचार की शुरुआत 7 दिसंबर को अखिलेश व जयंत ने मेरठ में साझा रैली करके की।अखिलेश और जयंत चौधरी के रथ यात्रा में गजब की भीड़ उमड़ती रही।
अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष सपा : कुल 24 जनसभा और प्रेस कांफ्रेंस कीं। जिसमें 16 छोटी जनसभाएं और 8 प्रेस कांफ्रेस शामिल हैं। पहले फेज के सभी 11 जिलों में प्रचार कर चुके हैं।
जयंत चौधरी, रालोद : कुल 41 जनसभा और प्रेस कांफ्रेंस की हैं। जिसमें 34 छोटी जन सभाएं शामिल हैं। 7 प्रेस कान्फ्रेंस भी हैं। पहले फेज के सभी 11 जिलों में प्रचार किया।

सपा और रालोद का साझा प्रचार

6 फरवरी : आगरा-मैनपुरी में अखिलेश और जयंत की विजय यात्रा।
7 फरवरी : सहारनपुर में अखिलेश और जयंत का विजय यात्रा के जरिए जनसंपर्क।
8 फरवरी : ममता बनर्जी ने भी अखिलेश के साथ साझा प्रेस-कांफ्रेस कर गठबंधन के समर्थन में प्रचार किया।

बीएसपी

मायावती, बसपा सुप्रीमो : पहले चरण के लिए 3 जनसभाएं आगरा, गाजियाबाद और अलीगढ़ में की।
सतीश मिश्रा बीएसपी यूपी के तमाम जिलों का दौरा किया।

Priyanka Gandhi addressing a rally

कांग्रेस

प्रियंका गांधी, कांग्रेस नेता : प्रचार से संबंधित कुल 14 प्रोग्राम किए। 12 डोर टू डोर कैंपेन किया। पहले फेज के 7 जिलों में चुनाव प्रचार कर चुकी हैं।

क्या रहे थे पिछली बार इन सीटों के नतीजे ?

शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, अलीगढ़, बुलंदशहर, आगरा और मथुरा की जिन 58 सीटों पर पहले चरण में वोट पड़ने वाले हैं, उनमें से 53 पर 2017 में भाजपा ने जीत हासिल की थी। सपा और बसपा के खाते में दो-दो सीटें गईं थी, जबकि एक पर रालोद प्रत्याशी की जीत हुई थी, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे।

2017 में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में बुरी हार का सामना करना पड़ा था। रालोद और बसपा ने अकेले चुनाव लड़ा था। रालोद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 23 जिलों की 100 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

  1. शामली : यहां कुल तीन विधानसभा सीटें हैं। 2017 में दो सीटों पर भाजपा, जबकि एक पर सपा प्रत्याशी की जीत हुई थी।
  2. हापुड़ : यहां तीन विधानसभा सीटें हैं। पिछली बार इनमें से दो पर भाजपा जबकि एक पर बसपा की जीत हुई थी।
  3. गाजियाबाद : एनसीआर में पड़ने वाले इस जिले में विधानसभा की कुल पांच सीटें हैं। 2017 में सभी सीटें भाजपा के खाते में गईं थीं।
  4. मेरठ : यहां विधानसभा की सात सीटें हैं। पिछली बार इनमें से छह पर भाजपा जबकि एक पर सपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी।
  5. मुजफ्फरनगर : पश्चिमी यूपी के इस महत्वपूर्ण जिले में पांच विधानसभा सीटें हैं। 2017 में सभी सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी।
  6. बागपत : यहां विधानसभा की तीन सीटें हैं। 2017 में इनमें से दो पर भाजपा जबकि एक पर रालोद प्रत्याशी की जीत हुई थी।
  7. बुलंदशहर : यहां सात विधानसभा सीटें हैं और 2017 में सभी भाजपा के खाते में गईं थीं।
  8. नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) : यहां की तीन सीटों पर 2017 में भाजपा उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी।
  9. अलीगढ़ : यहां की सभी सात सीटों पर 2017 में भाजपा प्रत्याशियों ने ही जीत हासिल की थी।
  10. आगरा : यहां विधानसभा की नौ सीटें हैं। 2017 में सभी सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी।
  11. मथुरा : यहां पांच सीटें हैं और इनमें चार पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, जबकि एक पर बसपा प्रत्याशी ने परचम लहराया था।

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