White collar jihadis on target of J&K police

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Whit collar jihadi in J and K

“वाइट कॉलर जिहादी” यानी साइबर आतंकियों पर प्रहार में जुटी J &K Police,कहा- दहशत फैलाने वाले आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक

Vinit Kumar

चित्रकूट उत्तर प्रदेश। “वाइट कॉलर जिहादी” यानी साइबर आतंकियों की चर्चा इन दिनों जम्मू कश्मीर में बेहद तेजी से हो रही है। सुरक्षाबल भी इन दिनों इन्हीं साइबर आतंकियों को गिरफ्तार करने की फिराक में है। Officers का कहना है कि यह अपनी पहचान छिपाकर गुमनाम बने रहते हैं और फिर युवाओं का बेहद आसानी से Brain wash कर अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने की साजिश करते हैं। अधिकारियों ने उन्हें बंदूक वाले आतंकियों यानी दहशत फैलाने वाले आतंकियों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है।

जम्मू कश्मीर के DGP दिलबाग सिंह, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक यह आशंका है कि यह वाइट कॉलर जिहादी लोगों का Brain wash कर उन्हें धर्म के प्रति कट्टर बना सांप्रदायिक दंगे करवा सकते हैं। दूसरे देशों में आराम से बैठे यह साइबर आतंकी सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ के जरिए युवाओं को भड़का सकते हैं। सेना के वरिष्ठ अधिकारी उन्हे वाइट कॉलर जिहादी कहा है जो युवाओं या आम लोगों को सोशल मीडिया पर झूठ और किसी हालात को अलगाववादियों या आतंकियों के मुताबिक मोड़ कर उन्हें भ्रमित करते हैं। यह देश की संप्रभुता और धर्म को लेकर झूठा प्रचार अभियान चला लोगों के मन में धर्म को लेकर हिंसा तक के लिए उकसाते हैं।


जहां पहले कभी युद्ध के लिए एक निश्चित मैदान व हथियार होते थे, परंपरागत हथियारों से जंगलों में मुठभेड़ होती थी तो अब वही युद्ध का मैदान भी बदल गया और हथियार भी। हथियारों की जगह कंप्यूटर स्मार्टफोन ने ले ली है और युद्ध के मैदान की सीमा को अनिश्चित कर दिया है। अब यह नए हथियारों से नया युद्ध किसी भी जगह में लड़ा जा सकता है कश्मीर में रहकर या कश्मीर से बाहर रहकर, घर पर बैठकर या गली के किनारे से ,किसी साइबर कैफे से या सुविधा मुताबिक फुटपाथ से भी।
हाल ही में J &K police ने 5 जिहादी को गिरफ्तार किया है पुलिस ने बताया कि इनको उन लोगों को निशाना बनाने को कहा गया था जिनके जरिए लोगों में डर कायम किया जा सकता था। जिनमें सरकारी अधिकारी, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील और राजनीतिक पदाधिकारियों के हिट व्यक्तियों को निशाना बनाने को कहा गया था।

DGP ने कहा, ”एक साइबर आतंकवादी असल में वास्तविक आतंकवादी से ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि वह छिपा हुआ होता है और वह पूरी तरह गुमनाम होता है। जब तक आपको सटीक जानकारी ना मिल जाए वह अनजान रहता है। इस तरह की जानकारी जुटाना और वर्चुअल दुनिया में वास्तव में कौन किसी पहचान का इस्तेमाल कर रहा है यह पता लगाना मुश्किल होता है। लोग साइबर दुनिया में इसका फायदा उठाते हैं और इसलिए वे इस तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं।”
DGP दिलबाग सिंह का मानना है कि साइबर आतंकियों को रोकना बेहद जरूरी है क्योंकि यह सबसे खतरनाक आतंकवादी है जो दिखते तो नहीं है लेकिन बड़ी संख्या में युवाओं के मस्तिष्क को प्रदूषित कर बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।

ऐसी ही नई खबरों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिए संध्या की रिपोर्ट thebawabilat पर।

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